रोपवे (लौह रस्सा मार्ग) एरियल लिफ्ट का एक बेहतर विकल्प 🚋🚋

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✒️संशोधित लेख :- एडिटर इन चीफ  PTN Dainik

रोपवे (लौह रस्सा मार्ग) एरियल लिफ्ट का एक बेहतर विकल्प  🚋

जहां पर की आज नई-नई तकनीकों के द्वारा जनता की आवागमन की तकलीफ और मुश्किलों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है नित नई -नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आमजन को सुविधाओं और सुगमता से जोड़ सकें। 

इसी संदर्भ में एस्केलेटर का अविष्कार हुआ जिस पर की यात्री या कंज्यूमर जो कि किसी मॉल में, या रेल्वे स्टेशन या एयरपोर्ट पर इस्तेमाल करके आते - जाते हैं  और अपनी एनर्जी भी बचाते हैं और समय भी बचाते हैं। 

साथ ही किसी भी बुजुर्ग या जरूरतमंद दिव्यांगजन को आसानी से लाते या लेजाते हैं। 

इससे पहले लिफ्ट का भी आविष्कार हुआ था लिफ्ट ऊर्ध्वाधर परिवहन प्रणालियों में से हैं, जो आधुनिक इमारतों में आवश्यकता का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। 

जोकि बहुत ही उपयोगी और सुविधाजनक  ऊपर या नीचे आने-जाने के लिए सुगमता और आवश्यकता का महत्वपूर्ण साधन बन गया है।

आज एलिवेटर और लिफ्ट आधुनिक इमारतों के आवश्यक घटक हैं। उन्होंने इमारतों के भीतर लंबवत चलने के तरीके में क्रांति ला दी है। 

आज हिमाचल में जो पहाड़ी इलाके हैं  उन पर इस प्रकार के प्रयोग किया जा रहे हैं, जिससे कि हिमाचल सरकार न केवल पर्यटकों को सुविधा से जोड़ें  बल्कि पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र भी बना सकें............... 

जी हाँ हम बात कर रहे हैं रोपवे (उड़न खटोले) की जिसमें बैठकर पर्यटक और हिमाचल की सुंदरता को निहारने वाले लोग बहुत चाव से जाते हैं और अपना कीमती समय और ऊर्जा को बचाते हैं ये लौह रस्सी का प्रयोग आने वाले समय में और भी ज्यादा लोकप्रिय होने जा रहा है। 

अब इस सुविधाजनक साधन के रूप में रोपवे मार्ग को शहरी और ग्रामीण इलाकों में वहां के निवासियों के लिए प्रयोग किया जाने का समय आ गया है! क्योंकि अब कोई भी शहर स्मार्ट सिटी तब ही बन सकता है, जबकि पहले वहां के लोगों की सुगमता और सहुलियत के लिए ऐसे मार्ग बनाए जाएं जहां पर की समय और ऊर्जा दोनों की बचत हो, ताकि उस ऊर्जा को अपने व दूसरे कामों में लगाकर अपने घर, समाज और देश के लिए कुछ काम आ सके। 

ऐसे ही कार्य आज हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री और लोक निर्माण मंत्री भी कर रहे हैं जो की बहुत प्रशंसनीय है। 

हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में कुछ कॉलोनियों का चुनाव करके जहां पर की एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं पहुंच सकती हैं और सीढियों की बहुतायत है साथ ही यहां की सड़कों के साथ कॉलोनी की गलियों का संयोजन नहीं हो सकता वहां पर उड़न खटोले रोपवे एक बहुत अच्छा विकल्प है। 

रोपवे चुनौतीपूर्ण इलाकों में आने-जाने का एक अनूठा और टिकाऊ तरीका है. ग्रैविटी और बिजली का इस्तेमाल करने के साथ यह एक अहम इको फ्रेंडली ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम माना जाता है। 

जरूरत है तो वहां के रहने वाले लोगों और प्रशासन की इच्छा शक्ति की जिससे कि यह सोच साकार हो सके। 

लेख का ये हिस्सा एक सरकारी आकड़ों के आधार पर लिया गया है कृप्या इसे भी ध्यान से पढें..... 

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भारत में रोपवे ( जिसे एरियल लिफ्ट , केबल कार या चेयर लिफ्ट के नाम से भी जाना जाता है ) एक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली है, जहां केबल की मदद से केबिन, गोंडोला या खुली कुर्सियों को जमीन से ऊपर और नीचे ले जाया जाता है।  भारत की पर्वतमाला योजना (शाब्दिक रूप से " पहाड़ माला योजना"), दुनिया की सबसे बड़ी रोपवे परियोजना, 2030 तक पांच वर्षों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में ₹ 1,250 बिलियन (यूएस $ 14 बिलियन) खर्च करने की परिकल्पना करती है , जिससे 1200 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 200 नई रोपवे परियोजनाएं बनाई जाएंगी। जो बड़े शहरों की संकरी सड़कों पर यातायात को कम करेगी और पहाड़ी और पर्यटन क्षेत्रों में सस्ती कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। चूंकि भारत का 30% हिस्सा पहाड़ों से ढका है, रोपवे विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोगी हैं। 

हमारे भारत देश की देवभूमि कहलाने वाले हरित प्रदेश और सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले हिमाचल प्रदेश जिसमें की शहरों में बसने वाले हिमाचली और गैर हिमाचली वासियों के घरों में अच्छी सुविधाएँ हैं और आधुनिक  हिमाचल के रहन- सहन को दर्शाते हैं। 

वहीँ पर एक समस्या जो हमेशा से इन कॉलोनियों के घरों में रहने वाले लोगों को जोकि काफी सारी सीढियों को प्रतिदिन उतरते और चढ़ते हैं मुँह बाये खड़ी रहती है फिर चाहे वो बुजुर्ग हों स्कूल जाते छोटे बच्चे हों, बीमार व्यक्ति, दिव्यांगजन या कोई गर्भवती महिला ही क्यों न हो सभी को सीढियों की बहुतायत की समस्या से रोजाना दो चार होना पड़ता है। 

क्योंकि ये परेशानी केवल उन्हीं को भुगतनी पड़ती है कि जिनके कि मकान 20-30 सीढियों से बहुत ज्यादा नीचे हैं जिनमें रहने वाले घरों के मालिक ही नहीं बल्कि किराएदार भी हैं, जिनको रहने के लिए अच्छी सुविधाओं वाला मकान जोकि कम किराये पर उपलब्ध हैं, किन्तु निवासियों को बहुत सी सीढ़ियों से समझौता करना पड़ता है।इन सीढ़ियों की संख्या 200 और इससे अधिक भी हैं। 

ऐसी ही कुछ स्थिति हमारे सोलन शहर के वार्ड नंबर -14 और 13 की कॉलोनियों की भी है। 

आये दिन ऐसी कई आपातकालीन परिस्थितियां सामने आती हैं, जब कि किसी  केस में जरूरत मंद व्यक्ति को समय पर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए इन्हीं सीढियों के बारे में कई बार सोचना पड़ता है। 

भविष्य में सभी ने जोकि आज जवान हैं कल उनको भी बूढ़ा भी होना है, और अन्तिम यात्रा के लिए भी इन्हीं सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ेगा। 

आज जहां पर हमारा प्रशासन, नगर निगम और नगर पालिका  लोगों की बुनियादी जरूरतों को मद्देनजर रखते हुए उनके स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए छोटे पार्क और गाड़ियों को खड़ा करने के लिए पार्किंग के निर्माण करवा रही है, वहीँ लोगों की सीढियों की समस्या को राहत देने के लिए क्यों नहीं सोचती, जबकि इन घरों में रहने वाले घरों के मालिक समय पर नगर निगम के द्वारा निर्धारित घर कर (हाउस टेक्स) भी देते हैं जरूरत है तो केवल एक सुदृढ़ इच्छाशक्ति की। 

हिमाचल प्रदेश के शहरी पहाड़ी क्षेत्रों में लिफ्ट और रोपवे ट्रॉली का प्रयोजन हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों की कमी और दुर्गम भूभाग के कारण, लिफ्ट और रोपवे ट्रॉली एक अच्छा विकल्प हो सकता है लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए।

हिमाचल प्रदेश में पहले से ही कई रोपवे परियोजनाएं हैं जो लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से यात्रा करने में मदद करती हैं। 

उदाहरण के लिए, शिमला में जाखू रोपवे और मनाली में सोलांग रोपवे हैं।

लिफ्ट और रोपवे ट्रॉली के प्रयोजन से न केवल लोगों को न केवल घरों तक पहुंचने में आसानी होगी बल्कि जरूरत मंद और अस्वस्थ लोगों को भी सुविधा पूर्वक चिकित्सालय जैसी जगह पर आसानी से व समय पर पहुंचाया जा सकता है। 

क्या ये कल्पना मात्र ही है ? 

हम लोगों को अभी ये कल्पना मात्र ही नजर आती है, किंतु यदि आमजन निवासी और प्रशासन अपनी इच्छा शक्ति का प्रयोग करें तो इस समस्या का हल निकाल सकते हैं। 

उपाय और निवारण :- ऐसी कॉलोनियों की समस्यायों को वहाँ के पार्षद और प्रतिनिधि चिन्हित करके अपने प्रशासनिक अधिकारियों को दे सकते हैं। 

शहर में बहुत सी कॉलोनियों के अंतिम छोर पर जहां नाले बहते हैं इनको भूमिगत पक्का करके और इनकी छत पर किसी चुनिंदा जगह जहां पर इस प्रकार के उपाय किए जा सकते हैं, जिसका संयोजन किसी पुल के द्वारा मुख्य सड़क से किया जा सकता है।

हालांकि, लिफ्ट और रोपवे ट्रॉली के प्रयोजन के लिए कई तकनीकी और वित्तीय मुद्दों पर विचार करना होगा। इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग और सामंजस्य की आवश्यकता होगी।

रोपवे और लिफ्ट की स्थापना के लिए कई अनुमतियों और मंजूरियों की आवश्यकता भी होगी, जैसे कि स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण विभाग, और अन्य संबंधित एजेंसियों से। इसके अलावा, रोपवे और लिफ्ट की स्थापना के लिए वित्तीय संसाधनों की भी आवश्यकता होगी।

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शिमला : - स्मार्ट सिटी के तहत बनाई गई इस योजना के तहत  अब लोगों को नहीं चढ़नी पड़ेंगी सीढ़ियां

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अब स्थानीय और पर्यटकों के लिए लोअर बाजार से मिडिल बाजार तक सफर आसान हो जाएगा. अब लोगों को सीढ़िया नहीं चढ़नी पड़ेगी. स्मार्ट सिटी के तहत बनाई गई इस लिफ्ट का संचालन लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आज से शुरू हो गया. 

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, "शिमला शहर में सुविधा देना सरकार की प्राथमिकता है. इसको लेकर सरकार काम कर रही है. शिमला शहर में स्मार्ट सिटी के बहुत से प्रोजेक्ट बनाकर तैयार हो रहे हैं. पार्किंग बन रही है. उसी के तहत लोअर बाजार से मिडिल बाजार के लिए लिफ्ट बनी गई है, जिसे आज जनता को समर्पित कर दिया है"

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि "इस लिफ्ट के बन जाने से खासकर वृद्ध जनों को लोअर बाजार से माल रोड जाने के लिए आसानी होगी. इसके अलावा दो और लिफ्ट बनाई जा रही है, जो जल्द बनाकर तैयार हो जाएगी. इसका कार्य जोरो पर चला हुआ है, जिसे जल्द ही जनता को सौंपा जाएगा. शिमला शहर में विकास कार्यों पर सरकार काम कर रही है. प्रदेश में जो नई नगर निगम बनी है, उनके लिए भी रोडमैप बनाया जा रहा है".




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